एपीजे अब्दुल कलाम जी की कुछ खास बातें, जो आपके दिल को छू जाएगी।

एपीजे अब्दुल कलाम जी की कुछ बाते, बहोत खास है और उन बातोमे से हमे बहोत कुछ सिखने की को मिलता है, की वह कैसे इंसान थे, क्या खूबियां थी, अब्दुल कलाम जी के पास. आज हम आपको ऐसे ही उनके कुछ खास बाते बताने जा रहे है.

आम तौर पे जब व्यक्ति बड़ा होता है, या राष्ट्रपति बन जाता है, तो कई कई ट्रक लेकर के राष्ट्रपति भवन जाता है, और कई multiplied extra ट्रक लेकर के बाहर निकलता है,

मगर एपीजे अब्दुल कलाम जी केवल एक मात्र ऐसे राष्ट्रपति थे जो दो सूटकेस लेके भवन में गए थे, और निकलते वक्त दो ही सूटकेस लेकर भवन से वापस आए थे,

एपीजे अब्दुल कलाम जी के कुल संपत्ति में क्या था?

कुछ नहीं था एक Rameswaram में उनका पैतृक घर, जो उनके पिता ने बनाया था, ढाई हज़ार उनकी किताबें, एक वीणा जिसको बजाने में उनको बड़ा आनंद आया करता था, वीणा बहुत बजाते थे,

एक उनकी कलाई की घड़ी, एक सीडी प्लेयर जिसमें वो भजन सुना करते थे, एक लैपटॉप था, छह शर्ट जिनमें तीन तो DRDO की दी हुई थी, तीन उनकी खुद की थी, चार पैंट थी जो दो DRDO की दी हुई थी, दो उनकी खुद की थी, तीन सूट थे और एक जोड़ी जूता,

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उनके पास खास बात क्या थी ?

उनके पास चालीस doctorate थी, खुद PHD की पढ़ाई कभी नहीं करी, कोई medical PHD की पढ़ाई नहीं करी, पर जिस university जाते थे लोग उन्हें doctorate देते थे,

law engineering science कितनी तरह की doctorate, Padma Bhushan, Padma Vibhushan, Bharat Ratna, Veer Savarkar award, Ramanujan Award, कई प्रकार के उनको award मिले,

उनकी एक बात मैं जरूर बताना चाहूँगा हालांकि वो मुसलमान थे लेकिन वेजिटेरियन थे, उनका बड़ा प्रेम था पक्षी जगत पर्यावरण का सूचक होता है, एपीजे अब्दुल कलाम जी क्या कहते थे, वो पर्यावरण का सूचक है, और अगर वो मुसीबत में है, तो समझ लेना कि अब हमारे भी बुरे दिन दूर नहीं है,

एक बार उनको जो डीआरडीओ की उनकी बाउंड्री दीवार हुआ करती थी, तो उनको बोला गया सिक्यूरिटी के लिए कांच वाच लगा दो, बोला बिल्कुल नहीं ये पक्षियों के लिए बड़ा घातक हो सकता है, उन्होंने मना कर दिया,

एपीजे अब्दुल कलाम

और जिस समय वो प्रेसिडेंट बने थे, बाद में जब वो राष्ट्रपति भवन के अंदर मुगल गार्डन में जब वॉक किया करते थे, तो एक मोर को देखा जो ना मुंह खोल रहा है, ना बंद कर पा रहा है, फिर उन्होंने veterinary doctor को बुला के देखा, तो मोर के गले में tumor है, ना मुँह खोल पा रहा है, ना मोर मुँह बंद कर पा रहा है, फिर उन्होंने उसका इलाज कराया,

एक लीडर की महानता का इसी बात से पता चलता है, कि वो किन लोगों की मदद कर रहा है, जो बदले में उन्हें कुछ नहीं दे सकते जब कोई लीडर ऐसे लोगों की मदद करता है, जो बदले में कुछ नहीं दे सकता वही एक महान लीडर की निशानी है,

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राष्ट्रपती भवन का उनका एक किस्सा

एपीजे अब्दुल कलाम जी वो परिवारवाद नहीं राष्ट्रवाद में विश्वास किया करते थे, जब वो राष्ट्रपति भवन में थे, उनके जो भाई थे उनको बहुत प्रेम करते थे, अपने भाई से बचपन से ही प्रेम था, और उनके अपने सगे भाई का पोता दिल्ली के अंदर मुनिरका में किराए के कमरे पढ़ा करता था,

एपीजे अब्दुल कलाम

2006 में जब एपीजे अब्दुल कलाम जी ने एक दफा सारे परिवार को इनवाइट किया, क्योंकि उनका कोई परिवार वहाँ रहता नहीं था, वो राष्ट्रपति भवन में अकेले रहते थे, और जब एक बार उन्होंने सारे परिवार को बुलाया राष्ट्रपति भवन में तो वो लोग आठ दिन तक रहे, और सारे परिवार क्योंकि दस भाई बहन थे, तो 52 लोग आए, और कलाम जी ने देखा बहुत खर्चा हो रहा है,

तो उन्होंने चाय की प्याली तक का हिसाब रखना शुरू किया, सब लोगों को उन्होंने अजमेर शरीफ प्राइवेट बस करके भेजा, उसका भी हिसाब रखना शुरू किया, उन्होंने अपने अकाउंटेंट से सारा हिसाब बनवाया, और बोला कि ये कितना बना तो देखा तीन लाख बावन हजार रुपए का चेक उन्होंने अपनी तनख्वाह से काट के दिया,

और कहा कि राष्ट्रपति भवन की जिम्मेदारी केवल राष्ट्रपति की होती है, पूरे परिवार की नहीं होती है,

एपीजे अब्दुल कलाम जी इतने विनम्र व्यक्ति थे विनम्रता ताज के बिना राजसी गौरव है, वो ऐसी चीज है, महान व्यक्ति की महानता ही उसकी नम्रता है,

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