Chauri chaura incident क्यों हुआ ये कांड, क्या है इसके पीछे की वजह.

Chauri chaura incident यह एक घटना थी, हम लोगों को इस घटना के बारे में अपने स्कूल में भी पढ़ाया जाता है. और हिंदुस्तान की आजादी के आंदोलन में इस Chauri chaura kand की एक बड़ी अहमियत है,

Chauri chaura Kand क्या है, क्यों हुआ, इतिहास में इसका नाम दर्ज क्यों है, और क्यों शताब्दी समारोह मना रहे है.

Chauri chaura कांड क्या है ?

Uttar Pradesh के Gorakhpur के पास एक छोटी सी जगह है और उस जगह पे दो गाँव है, असल में एक गाँव है Chauri, और दूसरे का नाम है Chaura, अगर आज के हिसाब से बात करें तो इन दोनों गाँव को मिलाकर आबादी करीब चौदह हज़ार होगी,

इन सबके पीछे की कहानी ये है कि उन्नीस सौ बीस इक्कीस में पहली बार अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन आजादी को लेकर और अंग्रेजों की दमन निति के खिलाफ Gandhi जी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया था,

असहयोग आंदोलन काफी अच्छा चल रहा था, और ऐसा लग रहा था कि अगर ये कामयाब हो गया तो शायद हम उसी वक्त आजादी हासिल कर लेते, हमें 1947 तक इंतजार नहीं करना पड़ता, मतलब करीब बीस पच्चीस साल पहले ही आजादी मिल सकती थी,

लेकिन Chauri Chaura incident ने इस असहयोग आंदोलन को ही खत्म कर दिया था,

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Chauri chaura incident क्यों हुआ ?

हुआ ये कि Gandhi जी की इस असहयोग आंदोलन को लेकर पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोग सड़कों पर आए जगह जगह रैलियाँ निकाली जाती थी, धरने प्रदर्शन नारे लगते थे,

चौरा चौरी कांड

ऐसी ही एक रैली Uttar Pradesh के इस Chauri Chaura गाँव में भी निकाली जा रही थी, तारीख थी 4 फरवरी 1922 बहुत सारे लोग सड़कों पर थे, असहयोग आंदोलन के लिए नारे लगा रहे थे, Gandhi जी की टोपी पहने हुए थे,

और इसी दौरान में जब Chauri Chaura से ये रैली गुजर रही थी, तो वहाँ पे काफी पुलिस वाले थे और उन पुलिस वालों ने इस रैली को रोकने की कोशिश की और कहा कि ये इसकी इजाजत नहीं है ये गैर कानूनी है,

तो वहाँ थोड़ी बहस हुई, इत्तेफाक से इसी दौरान में एक पुलिस वाले ने एक कार्यकर्ता की जो गांधी टोपी उसको सर से गिराकर और अपने जूतों तले कुचल दिया, इस टोपी के अपमान को उस रैली में शामिल बहुत सारे लोग बर्दाश्त नहीं कर पाए और इसी के बाद हाथापाई शुरू हो गई, हिंसा हुई,

पुलिस ने गोली चला दी, इस गोली में तीन लोग मारे गए, जब तीन लोगों की मौत हुई और कई घायल हो गए, तो फिर इस असहयोग आंदोलन की रैली में शामिल लोग भड़क गए इसके बाद उन्होंने Chauri Chaura थाने का घेराव कर लिया,

भीड़ काफी थी, पुलिस वाले कम थे चारों तरफ से पुलिस स्टेशन को घेर लिया, पुलिस वाले अपनी जान बचाकर चौरी चौराह उस थाने के अंदर अपने आप को बंद कर लिया,

Chauri chaura incident

फिर भीड़ ने भी थाने का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया, और इसके बाद उस थाने में आग लगा दी गयी, उस वक्त गुप्तेश्वर सिंह वहाँ के थानेदार थे, तो जब थाने में 21 पुलिस वाले और गुप्तेश्वर सिंह जो थानेदार ये बाईस लोग बंद हो गए,

इसके बाद भीड़ में से कुछ लोगों ने उस थाने में आग लगा दी, इस लगाने की वजह से पुलिस वाले बाहर नहीं निकल पाए बाईस के बाईस पुलिस वाले उनकी जिंदा जलने से मौत हो गई,

ये खबर आग की तरह पूरे देश में फैली, और कहते है कि इस घटना के बाद गाँधी जी को बड़ा झटका लगा, क्योंकि गाँधी जी अहिंसा के रास्ते पर चलकर आजादी हासिल करना चाहते थे, और उनका मानना था कि हिंसा का कोई रास्ता नहीं है, बेशक टाइम लगे लेकिन हम हिंसा के बलबूते पे आजादी नहीं लेंगे,

तो असहयोग आंदोलन गाँधी जी ने ही शुरू किया था लेकिन Chauri chaura incident के बाद 12 फरवरी 1922 को गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन अचानक वापस ले लिया, और कहा कि बस अभी खत्म,

उस वक्त के बहुत सारे जो नेता थे जो आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, वो Gandhi जी के इस फैसले के खिलाफ भी हुए, असहयोग आंदोलन काफी अच्छा चल रहा था, और इस तरीके से वापस नहीं लिया जाना चाहिए था, तो मतभेद भी हुआ,

जिसमें Pandit Jawaharlal Nehru और बाकी भी नेता थे, इस Chauri chaura kand के बाद असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया गया, ये इस घटना से जुड़ी हुई सबसे बड़ी चीज है.

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चौरा चौरी कांड के बाद क्या हुआ ?

चार फरवरी को Chauri Chaura kand हुआ, उसके बाद अंग्रेजों ने वहाँ पे जो घटना में शामिल लोग थे, जिन्होंने पुलिस स्टेशन में आग लगाई थी, उनमें से बहुत सारे लोगों को गिरफ्तार किया,

और जब गिरफ्तार किया, तो 200 से ज्यादा लोगों को पकड़ा गया, और इन लोगों में से बाद में करीब 172 लोगों को अदालत ने एक साल के अंदर अंदर ही फाँसी की सजा सुना दी,

pandit madan mohan malviya

तब इस मामले को लड़ रहे थे वकील Pandit Madan Mohan Malviya उन्होंने बाद में इसको challenge किया ऊपरी अदालत में और एक सौ बहत्तर जिन लोगों को फाँसी दी गयी थी, उनमें से 151 को बरी करवा दिया,

फिर कुल 19 लोग बचें उसके बाद अंग्रेज़ों ने 19 लोगों को फाँसी दे दी, इसके अलावा इन सभी को 2 से 11 जुलाई 1923 के बिच फांसी दे दी गई, फांसी देने के अलावा करीब 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई, गई कुछ लोगों को आठ साल की सजा सुनाई गई,

लेकिन Chauri chaura incident में जहाँ 22 पुलिस वाले जिंदा जलकर जिनकी मौत हुई थी. उसके बदले में अंग्रेजों ने 19 हिंदुस्तानियों को फांसी पे चढ़ा दिया,

Chauri chaura Smarak

इन उन्नीस के उन्नीस लोगों के स्मारक आज भी Chauri chaura में है, और इसी घटना को लेकर शताब्दी समारोह की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी शुरुआत की है.

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