WhatsApp चैट के जरिये कैसे एक कत्ल का खुलासा हुआ

WhatsApp Facebook सोशल मीडिया का इस्तेमाल लोग न जाने कैसा करते है.

पुलिस के सामने कातिल भी है, कातिल का एक फर्जी नाम भी है, लेकिन कातिल का असली चेहरा पुलिस को मालूम है न कातिल का असली नाम,

और यहाँ तक के इस कत्ल के जुर्म में एक महिला जो जेल में है, वो खुद नहीं जानती कि वो कातिल कौन है, उसका नाम क्या है, वो दिखता कैसा है, उसका चेहरा कैसा है,

हालांकि इस कत्ल में वो भी शामिल है, लेकिन पूरी तरह से नहीं, कहीं जाने में अनजाने में लेकिन ये एक ऐसा कत्ल है जिसमें कातिल का चेहरा छुपा हुआ है,

ना तस्वीर है, ना नाम है, ना पहचान है, और पुलिस उसे ढूंढ रही है,

तीन महीने तक पुलिस अंधेरे में रहती है. पुलिस पास कोई सबूत कोई सुराग नहीं,

पुलिस के पास एक सुराग है WhatsApp चैट ,लेकिन वो वहाँ तक पहुँच नहीं रही है.

whatsapp

और उस WhatsApp चैट को खंगालने में वहाँ तक पहुँचने में पुलिस को तीन महीने का वक्त लगता है, तीन महीने बाद जाकर कहीं उस WhatsApp चैट की सच्चाई सामने आती है,

और तब एक कत्ल का खुलासा होता है, और एक कातिल पकड़ी जाती है, दूसरा अब भी गुमनाम है रहस्यमय कातिल है, क्योंकि पुलिस के पास चेहरा नहीं है,

कहानी Bihar की है, Bihar से करीब बीस किलोमीटर दूर हाजीपुर एक जगह है,

बात 5 अक्टूबर की है, दोपहर का वक्त था और हाजीपुर में एक नौजवान गुजर रहा था बाइक पर उसके पास बाइक पे एक मिठाई का डब्बा भी था,

अचानक बाइक कुछ लोग रोकते हैं, और एक के बाद एक पांच गोली उस बाइक सवार को मारते हैं, पांच गोली खाने के बाद वो वहीं गिर पड़ता है,

इसके बाद कातिल वहाँ से भाग जाता है, थोड़ी देर के बाद लोग पुलिस को फोन करते हैं, पुलिस मौके पे पहुँचती है,

जो घायल थे उसको अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी,

whatsapp sanjay

इसके बाद उसकी तलाशी ली जाती है, तो तलाशी में उसकी कुछ पहचान पत्र मिलते हैं, उससे पता चलता है कि मरने वाले का नाम संजय है,

संजय के घर वालों को खबर दी जाती है, संजय की बीवी रिंकी संजय का भाई ये तमाम लोग मौके पर पहुँचते हैं, और पुलिस अपनी तफ्तीश शुरू करती है,

पहली चीज ये थी कि संजय के घर वालों को इस बात पे बड़ी हैरानी थी, कि वो हाजीपुर में क्या कर रहा है, क्योंकि हाजीपुर में उनका कोई रिश्तेदार नहीं कोई जानने वाला नहीं,

अब पुलिस ये तफ्तीश कर रही है, संजय का हाजीपुर से connection जोड़ रही है, कोई फायदा नहीं इस दौरान में पुलिस के पास संजय का मोबाईल भी था,

खास बात ये थी कि गोली मारने वाले ने संजय के साथ लूटपाट नहीं की थी, उसका पर्स उसके पैसे उसके मोबाइल सब कुछ लुटा नहीं था,

तो पुलिस ने भी शुरुआत में मोबाइल लिया, और उसके बाद रख लिया, उसके बाद जब मोबाइल की तफ्तीश जाँच होती है,

तो हैरान करने वाली चीज ये थी कि, मोबाइल में हमेशा संजय dual SIM इस्तेमाल करता था, उस मोबाइल में दो SIM थे, और दोनों SIM मोबाइल से गायब थे,

Sanjay

यानी कातिल ने कत्ल करने के बाद संजय का मोबाइल लिया उसमें से दोनों SIM निकाले, और SIM लेकर चला गया. और मोबाइल उसी के पास छोड़ दिया,

अब सवाल ये था ऐसा क्यों हुआ, तो पुलिस भी हैरान कि SIM क्यों नहीं है, उस SIM में क्या था।

पुलिस आती है इसके बाद अब तफ्तीश करती है, कोई दुश्मनी नहीं कोई ऐसी कुछ बात पता चली नहीं, संजय पटना में रहता था,

अपने परिवार के साथ उसकी एक बीवी थी रिंकी और दो बच्चे थे और आठ साल के दस साल पहले शादी हुई थी, पति पत्नी ने कभी कभी कहा सुनी झगड़ा हो जाता था,

दवा का कारोबार था, संजय दवा के बिजनेस में था, मेडिसिन सप्लाई करता था, तो पुलिस को कहीं से भी कोई ऐसी चीज़ नहीं मिली, जिससे ये पता चले कि संजय के इस कत्ल के पीछे वजह क्या है,

फिर पुलिस उस मोबाइल को खगालती है, और उस मोबाइल के पुराने सारे नंबरों को trace करने की कोशिश करती है, कि शायद उन नंबरों में से कोई कातिल मिल जाए,

तो जब वो सारे number try करती है, तो सबसे अहम नंबर जो आता है, वो मिलता है पाँच अक्टूबर का जिस दिन संजय का कत्ल हुआ,

पुलिस ने ये पाया कि कत्ल से पहले संजय एक नंबर पे लगातार बात कर रहा था, अब उस नंबर को टटोलती है,

क्योंकि बड़ा ये इम्पोर्टेन्ट हो गया था कि कत्ल से ऐन पहले संजय किसी से बात कर रहा है,

और उसके बाद उसका SIM गायब तो, आखरी जो कॉल है क्या वही कातिल है, इसके बाद पुलिस उस नंबर को खंगालती है, नंबर मिलता है, हाजीपुर के ही एक जगह है वहाँ का,

पुलिस उस घर में पहुँचती है, लेकिन जब घर पहुँचती है, तो पुलिस थोड़ी सी हैरान होती है, मायूस भी होती है,

वो घर एक राज मिस्त्री का घर था, बेहद गरीब और ये जो था राज मिस्त्री की पत्नी के नाम पे रजिस्टर्ड था,

वहाँ पूछताछ हुई तो पता चला कि हाँ ये नंबर उनका है, मतलब इस नंबर पे जो एड्रेस लिखाया गया था जो SIM लिया गया था, वो उन्हीं के राज मिस्त्री की बीवी के नाम पर है,

पर राज मिस्त्री की बीवी के पास अपना एक मोबाइल था, उसने कहा, कि इस नंबर को तो हम यूज़ नहीं करते, तो फिर पता चला कि ये फेक आईडी के जरिए ये नंबर को लिया गया था,

तो राज मिस्त्री या उसकी बीवी का इससे कोई लेना देना नहीं वो निहायत गरीब उनका संजय से भी कोई दूर दूर तक जान पहचान नहीं,

अब यहाँ पे फिर पुलिस अँधेरे में अब कातिल तक कैसे पहुँचे, पुलिस कोशिश करती रही लेकिन उनको फायदा नहीं हुआ, दिन बीतते गए,

तो पता नहीं क्यों आखिर में भी पुलिस आकर उस नंबर पर ठहर रही थी, कि चाहे ये फर्जी हो लेकिन इस तक पहुँच जाएँगे, तो कातिल मिल जाएगा, अब ये सारी चीजें चल रही थी,

उसी नंबर के पीछे पुलिस पड़ी हुई थी, और उसी नंबर के पीछे पड़ने का एक फायदा हुआ, अब पुलिस ने उस नंबर के बाकी नंबरों को टटोलना शुरू किया,

तो कई ऐसे नंबर मिले लेकिन सब नंबर बेकार मिले, एक नंबर ऐसा मिला जिसने पुलिस के कान खड़े कर दिए.

इस नंबर से, जिससे संजय कत्ल से पहले बात कर रहा था ,और जो एक राज मिस्त्री की बीवी के नाम पर था,

whatsapp

उसी नंबर से एक नंबर पे WhatsApp chat हो रहा था, लगातार जब और काफी chat हो रहा था और पिछले करीब महीने भर से हो रहा था,

पुलिस ने फ्रीक्वेंसी देखी चैट की तो उसको लगा कि इस नंबर का उस चैट के नंबर से जरूर कोई कनेक्शन है,

अब पुलिस ने उस नंबर को खंगाला, और वो नंबर निकला संजय की पत्नी रिंकी का, अब पुलिस यहाँ हैरान, कि संजय आखरी वक्त में जिस फोन नंबर पे बात कर रहा है,

वो नंबर एक फेकआईडी से लिया गया लेकिन उस नंबर पे वो शख्स संजय की बीवी से भी बात कर रहा था, लेकिन हमेशा उसने WhatsApp चैट किया और WhatsApp कॉल किए, वीडियो कॉल कोई नहीं था सिर्फऑडियो कॉल था,

अब पुलिस जब ये चीज पता चलती है तो, पुलिस के कान खड़े होते हैं, लेकिन यहाँ पे अब पुलिस को पता है कि इस नंबर से संजय की पत्नी रिंकी लगातार WhatsApp ऑडियो कॉल करती है,

और चैट करती है इस डिटेल को निकालने में बिहार पुलिस को करीब करीब तीन महीने लग गए Whatsapp chat तक पहुँचने में उतनी तेजी से काम नहीं कर पाए जो बाकी की national एजेंसियाँ करती है,

और यही वजह है कि पाँच अक्टूबर को कत्ल हुआ, और कहीं जाकर नौ जनवरी मतलब करीब तीन महीने और चार दिन के बाद पुलिस को इस WhatsApp chat और calling की पूरी detail मिली,

और जब chat repeat हुआ तो पता चला इन दोनों के अंदर बेहद करीबी बातचीत अच्छी बातचीत थी और एक दूसरे से लगभग प्यार करने वाली बात ये थी,

जब ये WhatsApp chat सामने आया था पुलिस ने रिंकी को थाने बुलाया ,और उससे पूछताछ की रिंकी टूट गयी, उसके बाद, जो उसने कहानी सुनाई वो कहानी और भी ज़्यादा हैरान और परेशान करने वाली थी,

रिंकी की कहानी ये थी संजय के साथ अक्सर उसका झगड़ा हुआ करता था एक पति पत्नी में अक्सर झगड़ा होता है उसमें भी हुआ करता था,और दो बच्चे थे लेकिन कई बार झगड़ा बहुत ज्यादा होता इस झगड़े की वजह से रिंकी खुद को अकेला महसूस करने लगी और इसी अकेलेपन के दौरान उसने अपना वक्त काटने के लिए social media का सहारा लिया।

वो Facebook और WhatsApp इन चीजों पे लगी रही, जब वो सोशल मीडिया पर आई तो इसी दौरान उसके जो WhatsApp पे डीपी थी उस डीपी में उसने अपनी एक बहुत खूबसूरत तस्वीर लगा रखी थी,

अच्छी डीपी की एक तस्वीर को देख कर रिंकी को एक गुमनाम शख्स ने रिंकी को WhatsApp पे मैसेज भेजा और उसने पहली बार भी ये लिखा कि आपकी डीपी बहुत खूबसूरत है मैं इसके ऊपर फिदा हो गया हूँ.

पहले इसको मजाकिया तौर पे लिया रिंकी ने फिर धीरे धीरे लगातार वो चैट करने लगा और बताया कि मैं बहुत सीरियस हूँ, आप वाकई बहुत खूबसूरत है,फिर उसकी बातों में रिंकी धीरे धीरे आनी शुरू हो गई और इन दोनों के बीच में बहुत सारी फिर बातें होने लगी और बहुत गहरी दोस्ती हो गई,

लेकिन अभी तक रिंकी और इन दोनों के बीच सिर्फ चैट हो रही थी इसके बाद फिर ये हुआ कि वीडियो कॉल और ये करो तो सामने वाला हमेशा मना कर देता है, कहता है कि उन सब चीजों से क्या फर्क है चेहरे में क्या रखा है बातें करना अच्छा लगता है तो हम बातें करते हैं,

अच्छा उस शख्स ने जिस जो डीपी पे तस्वीर देखकर फोन करता था उसकी अपनी डीपी में कोई तस्वीर नहीं थी, उसने शंकर भगवान की उसने तस्वीर लगा रखी थी,

तो कैसा दीखता क्या था रिंकी को मालूम नहीं, लेकिन रिंकी को उसकी बातें बड़ी पसंद थी, तो दोनों में दोस्ती हुई फिर प्यार हुआ दोनों एक दूसरे को प्यार का इज़हार करने लगे,

फिर ये हुआ कि video call करें उसने हमेशा video call करने के लिए मना कर दिया audio call करता audio पे दोनों की बातें होती, तब दोनों एक दूसरे को प्यार भरी बातें करने लगे,

इन्हीं बातों के दौरान एक दिन रिंकी ने अपने उस गुमनाम दोस्त हालांकि अपना नाम बताया उसने कहा चेहरा नहीं दिखाऊँगा video call नहीं करूँगा लेकिन नाम बताता और उसने अपना एक नाम बताया Amit,

तो Amit नाम से ही अब रिंकी और वो दोनों बात करते थे, काफी वक्त बीता बातचीत के दौरान एक बार रिंकी ने कहा कि मेरा पति मुझसे बड़ा झगड़ा करता है, लड़ाई करता है, समझ में नहीं आता क्या करू, कभी कभी लगता है कि भाग जाऊँ,

तो उधर से उसने कहा जब उसे पता चला कई बार रिंकी ने कहा कि पति से झगड़ा होता है, तब उसने कहा कि ऐसे शख्स को जीने का कोई हक नहीं है मैं उसे मार दूँ तो,

रिंकी ने भी इधर मज़ाक में कहा कि तुम उसको मार सकते, हो बोला हाँ मार सकता हूँ,

इसके अगले दिन से ही अमित, आज तुम्हारे पति संजय ने ये शर्ट पहनी है, आज उसने ये पेंट पहनी आज वो वहाँ गया था, आज यहाँ गया था, रिंकी पूछती है तुम्हें कैसे पता,

उसने कहा मैं उसका पीछा कर रहा हूँ, और तुमने कहा है तुमको खुशी चाहिए तो मैं उसको सच में मार दूंगा, वो लगातार उसकी डिटेल देता है, आज यहाँ गया, वहाँ गया,

फिर रिंकी ने कहा कि क्या तुम सचमुच उसे मार सकते हो,

और फिर 5 अक्टूबर की तारीख आती है, 5 अक्टूबर को संजय मिठाई का एक डब्बा लेकर हाजीपुर जाता है, और रास्ते में ही एक शख्स उसे पाँच गोली मारता है,

फिर कत्ल के कुछ देर के बाद ही, अमित रिंकी को WhatsApp call करता है और कहता है मैंने तुम्हारा काम कर दिया, तुम्हारे पति का मैंने कत्ल कर दिया, पाँच गोली मारी,

रिंकी ये सुनकर घबरा जाती है लेकिन उसे लगता है मजाक कर रहा है, पर थोड़ी देर के बाद पुलिस का call आ जाता है, और फिर पता चल जाता है, कि हाँ संजय की मौत हो गयी, और उसे गोली से मारा गया,

अब रिंकी की हालत खराब हो जाती है, सबसे पहले वो उस SIM card और वो सारी चीज़ें जो है, उसको निकाल कर फेंकती है, जिससे अमित के साथ chat हुआ करता था,

लेकिन वो पुलिस को ये बात नहीं बताती कैसे किसी शख्स ने या जिसके साथ chat होता है, उसने ये सारी चीज़ें की है, और इस बात को वो दबा लेती है,

अब इसके बाद ये सारी चीजें WhatsApp chat के जरिए पुलिस के सामने आती है, इसी के बाद पुलिस 9 जनवरी को रिंकी को गिरफ्तार कर लेती है,

अब इस कहानी को सुनने के बाद, पुलिस के सामने चैलेंज ये था, कि उस अमित नाम के रहस्यमय शख्स को सामने लाया जाए, अब पुलिस ने सारी कोशिश कर ली. अब यहाँ पे दिक्कत एक जिस नंबर से अमित बनकर वो रिंकी से बात कर रहा था वो नंबर भी फेक आईडी पे लिया गया.

और उसका कोई सुराग नहीं अमित का नाम अमित है, जाहिर सी बात है इसमें भी डाउट है, ये नाम भी शायद उसका फर्जी है, अमित का असली नाम क्या है ये पुलिस को पता ही नहीं है, अमित रहता कहाँ है ये पुलिस जानती नहीं है,

आज हम जनवरी 2021 में आ गए करीब तीन महीना और एक हफ्ते का वक्त बीत गया, लेकिन संजय का कातिल कौन है दिखता कैसा है कहाँ रहता है असली नाम क्या है, Bihar पुलिस को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

ये भी पढें नाम

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker