Indira Gandhi को जेल से आजाद कराने के लिए, कैसे प्लेन को हाइजेक किया जाता है.

Indira Gandhi ने लगाए हुई इमरजेंसी हटने के बाद और मोरार्जी देसाई की अगुवाई में पहली बार आज़ाद हिंदुस्तान में गैर कांग्रेसी सरकार बनी, और उस वक्त जब ये सरकार बनी वो भारतीय जनता पार्टी की बनी थी.

मोरार्जी देसाई

तो लोगों में और नेताओं में हर तरफ बहुत गुस्सा था इमरजेंसी को लेकर, और खास तौर पर Indira Gandhi को लेकर और इसी वजह से लगभग एक उथल पुथल का माहौल था.

और बहुत से नेता इस ताक में इस राख में थे कि एक बार सारी चीजें कंट्रोल में हो. तो इमरजेंसी के लिए और बाकी चीजों के लिए फिर Indira Gandhi को जेल भी भेजा जाए. और वही हुआ इंदिरा गांधी को अलग अलग इल्जामों में जेल भेज दिया गया.

Indira Gandhi In Jail

देश में सरकार चल रही थी सब कुछ सामान्य होता जा रहा था, लेकिन तभी 20 दिसंबर 1978, मतलब emergency पचहत्तर में लगी तो उसके बाद चुनाव हुआ.

फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार आयी, तो ये बात तब की है जब Indira Gandhi को जेल भेज दिया गया,

और जेल भेजने के बाद 20 दिसंबर 1978 को Indian Airlines की उड़ान संख्या 401 ये कोलकाता से दिल्ली आ रही थी.

401

और उसे Lucknow में रुकने के बाद इसको दिल्ली आना था, शाम करीब 5 बज के 45 मिनट पर ये प्लेन लखनऊ में रुकने के बाद उड़ान भरती है. दिल्ली के लिए,

और अब दिल्ली की दूरी करीब एक घंटे में तय की जानी थी इस प्लेन में कुल एक सौ छब्बीस मुसाफिर और क्रू मेंबर सवार थे. सब कुछ अभी तक ठीक था.

कोलकाता से करीब डेढ़ पौने दो घंटे की उड़ान भर चुकी थी. प्लेन दूरी तय करके लखनऊ पहुंची थी, लखनऊ से पौने छह बजे अब ये दिल्ली के लिए उड़ान भर चुकी है, लगभग पैंतालीस मिनट का वक्त बीत जाता है.

6:30 बजे के आसपास शाम को 20 दिसंबर 1978 अब ये प्लेन दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड करने वाला था. सब कुछ अभी तक ठीक ठाक था.

अब सिर्फ 15 मिनट बाकी थे इस प्लेन को लैंड करने के लिए लेकिन 15 मिनट पहले ही अचानक इस प्लेन में दो ऐसे मुसाफिर बैठे थे जो अपनी सीट से खड़े होते हैं.

भोलानाथ पांडे और देवेंद्रनाथ पांडे

उनमें से एक का नाम था भोलानाथ पांडे और दूसरे का नाम था देवेंद्रनाथ पांडे और ये दोनों एयर होस्टेज को चकमा देते हुए Plane के Cockpit की तरफ बढ़ जाते हैं.

उस वक्त टेररिज्म हाइजेकिंग और एयरपोर्ट पे तरह के खतरे बड़े कम हुआ करते थे. ये सारी चीजें बाद में आई हैं. तो जितनी सिक्योरिटी की हम अभी देखते हैं, सारी चीजें उस वक्त उतनी नहीं थी.

तो ये दोनों भोलानाथ पांडे और देवेंद्रनाथ पांडे Plane के Cockpit की तरफ बढ़ जाते हैं Cockpit पे भी उस वक्त इतनी सुरक्षा नहीं होती थी, जैसे अब ये है.

तो ये दोनों Plane के Cockpit के अंदर पहुँचते हैं, और उसके बाद सीधे जो पायलट है, उसको धमकाते है, और वो उसे कहते है कि हमारे पास बॉम है, और अगर आपने हमारी बात मानी नहीं तो, हम इस प्लेन को उड़ा देंगे.

इसी के बाद पायलट जो है वो एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी दिल्ली को इनफॉर्म करता है, की 15 मिनट पहले दो लोगों ने हमारे प्लेन को हाइजेक कर लिया है.

और ये दोनों अब मांग कर रहे हैं कि इस प्लेन को वापस दिल्ली की बजाय, पटना की तरफ ले चलिए, 15 मिनट की दूरी है लैंड करने के लिए लगभग दिल्ली की सीमा में प्लेन दाखिल हो चुका है,

और अब अचानक दो हाइजेकर कहते हैं कि आप इसका रुख मोड़िए और पटना ले चलिए पायलट को समझ में नहीं आ रहा है, पायलट एटीसी से बताता है और सारी चीजें पूछता है,

फिर किसी तरह से हाईजैकर को ये बताया जाता है कि, Plane पटना तक पहुँचना मुश्किल है.

तो फिर बात तय होती है, कि ठीक है, आप इसको बनारस ले चलिए, यानि कि वाराणसी ले चलिए, पायलट के पास और कोई ऑप्शन नहीं था,

तो वो उस प्लेन को फिर मोड़ते हैं और बनारस की तरफ ले जाते हैं, शाम करीब साढ़े सात पौने आठ के आसपास जो प्लेन दिल्ली में लैंड करनी थी, लगभग पौने सात साढ़े छह बजे वो अब बनारस एयरपोर्ट पर जाकर लैंड करता है.

Plane हाईजैक क्यों किया गया

लैंड करने के बाद पहली बार ये दोनों भोलानाथ और देवेंद्रनाथ पांडे खुलासा करते हैं कि उन्होंने Plane हाइजेक क्यों किया है.

इसके बाद इन दोनों ने जो अपनी मांग रखी, वो मांग सुनकर पहली बार तो जो ATC और बाकी लोग थे वो थोड़े से उनको अजीब भी लगा, उनका कहना था कि Indira Gandhi को जेल से फौरन रिहा किया जाए.

Sanjay Gandhi

और Sanjay Gandhi के खिलाफ जितने भी मामले दर्ज है उनको वापस लिया जाए, अगर ये दोनों मांगे मानी नहीं गई तो, हम दोनों इस प्लेन को बॉम्ब से उड़ा देंगे,

और एक सौ छब्बीस मुसाफिरों की जान चली जाएगी, मांग अजीब सी और इससे ये पता चल गया कि ये दोनों Indira Gandhi के करीबी है. या फिर समर्थक हैं.

फिर धीरे धीरे पता किया गया तो पता चला कि ये दोनों यूथ कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी के बाद से गुस्से में थे.

और Indira Gandhi को जेल से बाहर लाने के लिए उस वक्त से कुछ अलग अलग प्लानिंग कर रहे थे. जब उन्हें कुछ और नहीं सुझा तो फिर उन्होंने एक प्लेन हाइजेक किया,

और ये इस उम्मीद पर कि शायद मुसाफिरों की जान के बदले सरकार मान जाएगी, और Indira Gandhi को जेल से रिहा कर दिया जाएगा,

जब इनकी मांग पहुँची तो दिल्ली की सरकार तक भी ये बात पहुँची और मामला नाजुक था, क्योंकि एक सौ छब्बीस मुसाफिरों की जान की बात थी.

Ram Naresh Yadav

और उस वक्त Ram Naresh Yadav उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने खुद एटीसी के थ्रू हाईजेक्टर से बात की, उन्हें समझाने की कोशिश की.

लेकिन वो अपनी जिद पे अड़े हुए थे, कि जब तक इंदिरा गांधी रिहा नहीं होंगी। वो इस प्लेन को छोड़ेंगे नहीं,

तो अजीब मुश्किल थी और पल पल बीत रहा था ये भी था कि नौसिखिए भी है, हो सकता है ज्यादा खतरा हो घबराकर डर कर अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो प्लेन को उड़ा दे तो, अजीब कशमकश थी,

इसी दौरान में इस हाईजैकिंग की खबर radio पे भी आ गयी, और ATC से लिक हो गई, जब ये खबर पहुंची तब देवेंद्रनाथ पांडे और भोलानाथ पांडे इनके पिता बनारस में ही थे,

और तेजी से ये बात फैली कि प्लेन हाइजेक कर लिया गया इंदिरा गांधी की रिहाई की मांग की गई है.

भोलानाथ पांडे के पिता ने प्रशासन को कांटेक्ट किया,और उन्होंने कहा कि वो अपने बेटे से बात करके उसके मनाने की कोशिश करते हैं, प्रशासन तैयार हो गए क्योंकि और कोई ऑप्शन नहीं था.

इसके बाद उन्हें आनन फानन में बनारस एयरपोर्ट लाया गया, और एटीसी के थ्रू भोलानाथ और देवेंद्र पांडे से उनको संपर्क कराया गया, उन्होंने समझाया कि ये गलत है.

औरIndira Gandhi की भी सरकार रिहाई कर देगी, ज्यादा दिन उनको जेल में नहीं रहना पड़ेगा,

लेकिन आप इस प्लेन को जो है रिलीज़ कर दो, मुक्त कर दो, और मुसाफिरों को आप छोड़ दो, काफी लंबी बात चली और आखिरकार बात की बात उन्होंने मान ली.

और अपने पिता की बात मानते हुए दोनों ने मुसाफिरों को प्लेन से बाहर जाने की इजाजत दे दी, ना सिर्फ इजाजत दी बल्कि फिर उन्होंने पायलट को बताया कि दरअसल उनके पास कोई हथियार ही नहीं है.

cricket

जो एक गन थी था वो नकली थी और जिसे वो बम बता रहे थे वो cricket का एक ball था उस ball को उन्होंने कपड़े में लपेट रखा था, और उससे ऐसा लग रहा था कि इसके अंदर bomb है.

इसके बाद पुलिस पहुँचती है, उन दोनों को गिरफ्तार करती है नीचे लाती है, मुसाफिरों को फिर बाहर लाया जाता है, और अगली सुबह उन तमाम मुसाफिरों को वापस दिल्ली पहुँचाया जाता है,

फिर इन दोनों को जेल भेजा गया, सजा हुई, लेकिन सजा काटने के बाद ये बाहर आते हैं.

तब तक Indira Gandhi भी रिहा होती है, फिर वापस सरकार में भी बनती है. तो इन दोनों को बाकायदा इनाम भी मिलता है.

इनमें से एक को बाकायदा Congress party ticket देती है. चुनाव लड़ने के लिए और दूसरे को यूपी कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया जाता है. वो इनाम एक तरह से इंदिरा गांधी को वफादारी दिखाने के लिए था.

Indira Gandhi

लेकिन शुक्र ये है कि इस पूरी हाईजैकिंग में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचा, और ये plane और उसके मुसाफिर सुरक्षित रहे,

कैसे एक नेता की रिहाई के लिए, एक Indian Airlines के plane को hijack किया गया,

एक सौ छब्बीस मुसाफिरों की जान खतरे में डालकर लेकिन अंत में सब कुछ अच्छा हुआ.

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