कैसे इस शख्स ने 31 साल तक हमारे देश के सभी अदालतों को चुना लगाया।

एक शख्स इकत्तीस साल तक हिंदुस्तान की जितनी भी अदालतें है मतलब तीन ही अदालतें होती है जो में lower court, High Court and Supreme Court हर अदालत को इसने चकमा दिया, एक शख्स जो कानून को कैसे इस्तेमाल करता है,

बात है ये फरवरी 2007 की Chhattisgarh में एक दुर्ग शहर है, दुर्ग शहर में एक शाम करीब पचास साल का शख्स मार्केट में घूम रहा था, वो पहले एक रेस्टॉरंट में जाता है, वहाँ कुछ खाता पीता है, कॉफी पीता है फिर बाहर निकलता है, सिगरेट पीता है और यूँ ही टहल रहा होता है,

लेकिन तभी एक शख्स की नज़र उस पर पड़ती और वो चौंक जाता उस शख्स को देखकर उसे लगता है कि ये यहाँ कैसे, और फिर धीरे धीरे वो उसका पीछा करता है, तो जो उसके मन में शक था कि ये वही है, वो थोड़ी देर के बाद यकीन में बदल जाता है कि हाँ ये वही है,

और फिर पीछा करते करते फिर कहानी आगे बढ़ती है और फिर उसकी असलियत सामने आती है, और फिर वो क्यों चौका एक आदमी को मार्केट में देखकर उसकी भी सच्चाई सामने आती है,

क्या है पूरी कहानी

जिस शख्स को देखकर वो चौका था उसका नाम था Nand Kishore Khandelwal उर्फ Nandu दुर्ग का रहने वाला था, Nandu की उमर उन्नीस साल की थी अभी जो पचास साल का हो गया था,

तो Durg में रहने के दौरान 31 जनवरी 1976 को दुर्ग में एक लड़की को किडनैप कर लिया जाता है, और किडनैप करने के बाद उस लड़की के साथ रेप होता है, और फिर उस लड़की को इस धमकी के साथ छोड़ दिया जाता है कि अगर तूने अपनी अपना मुँह खोला और पुलिस को बताया या घरवालों को बताया तो पूरे परिवार को मार देंगे,

वो लड़की घबरा जाती किसी तरह से अपनी इज्जत तो बची नहीं जान बचाकर वहाँ से बड़ी मुश्किल से घर पहुँचती है, लेकिन लड़की बहादुर थी वो अपने माँ बाप को सारा सच बता देती है, और इसके बाद माँ बाप पुलिस स्टेशन पहुँचते है,

पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखाते है, पुलिस किडनैपिंग और रेप का मामला दर्ज करती है, लड़की के बयान के आधार पर तलाश शुरू होती है, इसके बाद दो शख्स को उठाया जाता है, उनमें से एक था Nand Kishore Khandelwal उर्फ Nandu और दूसरा था उसका दोस्त Pappu लड़की इन दोनों की शिनाख्त कर लेती है,

इसके बाद दुर्ग पुलिस इन दोनों को गिरफ्तार कर लेती है, रेप और किडनैपिंग के मामले में फिर मुकदमा दर्ज होता है, गिरफ्तारी के बाद charge sheet दाखिल होती है lower court में मामला जाता है,

जब lower court में मामला गया इस दौरान ये 1976 की बात थी और तब रेप और ये सारी चीज़ों को लेके जभी हमारे देश में एक माहौल है जो कड़ा कड़ा कानून है, इन सबकी बातें हो रही है उस वक्त शायद ऐसी चीज़ें नहीं थी, और तब उम्र कैद भी चौदह साल की थी,

तो charge sheet दाखिल होते ही Nandu और Pappu को ज़मानत मिल जाती है, और ये दोनों ज़मानत पर बाहर आ जाते है, इसके बाद धीरे धीरे अपनी रफ्तार से जो मुकदमा है वो आगे बढ़ता है,

कई साल के बाद lower court का फैसला आता है, और lower court Pappu और Nandu nand Kishore Khandelwal इन दोनों को किडनैपिंग और रेप के इलज़ाम में दस साल की सज़ा सुनाती है, तो उस वक्त दस साल की बड़ी सज़ा हुआ करती थी

दोनों उस वक्त जमानत पे बाहर थे लेकिन जमानत पे जब ये बाहर थे lower court का फैसला नहीं आया था उसी दौरान किसी बीमारी की वजह से जो Nandu का दोस्त था Pappu उसकी मौत हो जाती है,

Nandu जमानत पे बाहर था lower court का आखिरी फैसला आता है, lower court इसे दस साल की सजा सुनाती है, लेकिन lower court के इस फैसले के बावजूद Nandu जेल नहीं जाता ना पुलिस उसे पकड़ती है, वो बाहर आज़ाद घूमता रहता है,

और इस फैसले को वो High Court में Jabalpur High Court में challenge करता है Jabalpur High Court भी अपना वक्त लेती है और फिर फैसला सुनाती है, और lower court था उसके फैसले को बरकरार रखती है, और कहती है कि इसे दस साल की सज़ा होनी चाहिए।

अब lower court से दस साल की सज़ा हो गयी, Jabalpur High Court ने दस साल की सज़ा दे दी, अब भी Nandu कोई गिरफ्तार नहीं करता, अब भी Nandu jail नहीं जाता, वो आज़ाद घूम रहा है,

अब Nandu के दिमाग में लेकिन एक चीज चल रही थी, कि ये दो तो हो गया लेकिन ये मामला Supreme Court में देर सवेरे जो उसका भांडा है सारा फुट जाएगा, तो Supreme Court से वो फँस सकता है,

वो अपने आप एक ऐसा मुजरिम जिसको lower court ने फैसला सजा दस साल की थी High Court ने दस साल की सजा दी. वो जेल नहीं जाता वो सीधे उसके बाद खुद ही Supreme Court पहुँच जाता है,

और Supreme Court में Jabalpur High Court के उस फैसले को challenge करता है, कि दस साल की सज़ा सुनाई गयी है, रेप और किडनैपिंग के मामले में लेकिन मैं बेगुनाह हूँ, तो उस फैसले को challenge करता हूँ,

Supreme Court भी उस मामले को रखती है और वक्त बीतता है, 9 फरवरी नौ 1994 को अब Supreme Court फैसला सुनाती है, और कहती है कि lower court Jabalpur High Court इन दोनों ने जो फैसला सुनाया वो सही है, इस मामले में दस साल की ही सजा होगी कोई मरम्मत कोई रियायत नहीं होगी,

देश की तीन अदालतें जो पूरा एक हमारी न्यायिक व्यवस्था है, lower court जिसके फैसले को आप High Court में challenge करते है, High Court जिसके फैसले को आप Supreme Court में challenge करते है, ये पूरा case कानूनी तरीके से तीनों court में गया,

अब Supreme Court ने भी कहा कि दस साल की सजा होगी, लेकिन Supreme Court देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले के बावजूद Nandu को फिर कोई जेल नहीं ले जाता, आज़ाद घूमता रहता है,

Supreme Court के फैसले के करीब तेरह साल बाद भी वो दुर्ग के मार्केट में खुलेआम घूम रहा है, फर्क ये था कि 1976 में जब ये घटना हुई थी तब वो उन्नीस साल का एक लड़का था, अब 2007 में उसकी उम्र पचास साल हो चुकी थी,

तीन तीन अदालतों के फैसले के बाद इकतीस साल उसने आज़ादी में काट डाले, अब सवाल ये उठता है कि मुकदमे की जो पूरी प्रक्रिया होती है, जो कानून व्यवस्था है, अदालत है, और Supreme Court जैसी अदालत इसमें सजा सुनाई है, और वो शख्स एक दिन के लिए भी जेल नहीं गया ऐसा कैसे मुमकिन हुआ,

ऐसी क्या बात थी की nandu जेल नहीं गया

यहीं से Nandu का खेल शुरू होता है, Nandu का जब ये मामला lower court में गया, और जब वो इस घटना के बाद गिरफ्तार हुआ फिर जमानत पे बाहर आ गया, तब उसने सोचना शुरू किया,

और उसकी पहली सोच ये थी कि, इस मामले में उसको सज़ा तो होगी, और इस सज़ा से उसको कोई बचा नहीं सकता चाहे कितना अच्छा वकील कर ले, दूसरी सोच उसकी ये थी कि जो उसका साथी था इसमें Pappu जो उसका दोस्त था वो मर गया, तब ये सज़ा उसे अकेले काटनी पड़ेगी,

तो उसने ना कि अच्छा वकील हो या उसने कोई और तिकड़म आजमाने की सोची उसने सोचा कि फैसला आने दो,लोग फैसले से पहले सारी चीज़ें करते हैं, मैं फैसले पे डाका डालूँगा,

और इसके बाद वो ज़मानत पे जब बाहर आया, तो उसने अपना पूरा ध्यान जो है इस तरीके के सोचने में लगा दिया कि कैसे अदालत को अदालती फैसले को चुराया जा सकता है कैसे उनको बेवकूफ बनाया जा सकता है और कैसे उन फैसलों से बचा जा सकता है

nandu फिर अदालतों के चक्कर लगाना शुरू किया, और शुरुआत होती lower court से वहाँ जाने के बाद धीरे धीरे एक एक कर से ये दोस्ती करता है, बहुत लंबा इसने सब्र किया दिन दिन भर जाकर वहाँ घूमता बेवजह लोगों से मिलता, अदालती मुलाज़िम से मिलता, अंदर में जज साहब के और इन सबके जो बाकी कर्मचारी होते हैं उनसे मिलता,

मगर अपनी असलियत नहीं बताता, फिर उन सबसे मिलके उसने एक दोस्ती बनाई उसके बाद उसे ये पता चला कि एक अदालत में हम सब जानते हैं, कि बहस होती है उसके बाद अदालत अपना फैसला सुनाती है,

लेकिन उस फैसले का क्या होता है ये उसने सारी चीज़ें सीख ली जब lower court का फैसला आया तो उस फैसले की copy सीधे सीधी जो IO और जो थाने में ये मामला था वहाँ जाना था,

और वहाँ से जैसे ही जिस दिन फैसला, आया दस उसी दिन कायदे से इसको गिरफ्तार करके इसकी जमानत खारिज उसी दिन मानी जाती, और इसको जेल भेज देते,

क्योंकि पाँच साल से ज्यादा जिस अगर सजा होती किसी मामले में तो उसमें फिर आपकी बेल खारिज हो जाती है, फिर आपको बेल लेने के लिए ऊपरी अदालत में जाना पड़ता है,

इसने इंतजार किया फैसले का और उसके बाद इसने सारा चेन पकड़ लिया था ये फैसला कहा टाइप होगा ये फैसला किसके हाथ में जाएगा, कौन अर्दली मुंशी कौन बाबू होगा जो इसकी कॉपी पुलिस तक पहुँचाएगा, ये उसने पूरा चेन एक एक कर जो इसने लगाए कई साल ये इसीलिए लगाए थे जब इसके फैसले की कॉपी आई पहले से इसकी सेटिंग थी इसने अदालती सीलबंद उस फैसले को कोर्ट के मिलीभगत से जो कर्मचारी थे वो हथिया लिया,

वो फैसले की copy कभी पुलिस के पास पहुँची ही नहीं, तो जब पहुँची नहीं तो पुलिस को पता भी नहीं कि कौनसी सजा कैसी सजा क्या सजा

अब उसके बाद lower court के फैसले को ये चुपचाप से इसने चुरा लिया रख लिया किसी को पता ही नहीं कि कब फैसला आया क्या फैसला आया किसको जेल भेजना है,

लेकिन डर इसी का था कि देर सवेर उसका भांडा फूट जाएगा क्योंकि record अभी police station में भी है, तो फिर उसने दुर्ग में एक लड़की के साथ उस रेप केस की जो पूरी फाइल थी वो उस police station से गायब कर देता है,

मतलब जिस शख्स के खिलाफ मुकदमा हुआ वो तो उसकी पूरी पहचान उसकी पूरी सच्चाई उसने खत्म कर दी, अब वहाँ से case की file गायब, अदालत से फैसले की copy गायब,

अब तीन court का फैसला आ गया, तीनों court ने दस साल की सजा बरकरार रखी, लेकिन फैसले की copy कभी भी उस संबंधित शख्स तक पहुँचा ही नहीं, जो आगे क्या इसपे कार्यवाही करता पालन कराता मतलब Nandu को उठाकर जेल भेजने का काम करता,

अब इसने फैसले की कॉपी उड़ा ली, पुलिस स्टेशन सारे रिकॉर्ड इसने खत्म कर दिए, अब ये बेफिक्र था

आखिर में ये कैसे पकड़ा जाता है

2007 में इत्तेफाक से एक शख्स और वो शख्स वो था जिसने इसको देखा था वो जिस लड़की का रेप हुआ था उस लड़की का चाचा था, case से जुड़ा हुआ मामला था तो Nandu कई बार उसने देखा था तो उसे बड़ी हैरानगी हुई थी, मगर उसे इन सारी चीजों का पता नहीं था,

फिर जब उसने पता करना शुरू किया तो, फिर वो धीरे धीरे चीजें सामने आयी उसके बाद उसने वहाँ के पुलिस को बताया, उसके बाद उसे पकड़ा, फिर पकड़ने के बाद जब उससे पूछा गया, पूछताछ हुई, तो फिर उसने सारी कड़ियाँ बताई, फिर उसमें कुछ अदालत के कर्मचारी, और बाकी लोग भी पकड़े ग,ए उसके बाद फिर इसपे मुकदमा शुरू हुआ,

लेकिन कुछ साल के बाद, इसके अच्छे चाल चलन की वजह से, और उम्र भी हो गयी थी, पचास साल की उम्र में पकड़ा गया था, उसके बाद ये करीब चार पाँच साल ही जेल में और रहा फिर इसको माफी दे दी गयी, सज़ा कम हो गयी, और ये बाहर आ गया,

तो ये हिंदुस्तान का इकलौता ऐसा शख्स होगा जिसने दस साल की सज़ा पाने के बावजूद एक नहीं दो नहीं और छोटी नहीं बड़ी नहीं जो पूरे सिलसिलेवार हमारी system है judicial की उसने हर अदालत को चुना लगाया

ये भी पढें क्या आप जानते है की, 15 अगस्त और 26 जनवरी, को तिरंगा फहराने में बहोत फरक है.

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