Titanic Ship कैसे डूब गया, और Titanic Ship किसने बनाया था.

Titanic Ship किसने बनाई

Titanic Ship बनाने का ख्याल उस वक्त इसलिए आया, कि दुनिया में पानी पे सबसे तेज चलने वाला एक जहाज बनाना था, जिसकी गति बहुत ज्यादा हो, जहाज आलीशान हो, पानी पे चलता फिरता एक पाँच सितारा होटल हो, हर आराम हर उस जहाज में मुहैया कराया जाए,

और इसी को सोच कर एक Bilfast Island है, वहाँ पे Harland and Wolff ये दो shipyard है, जहाँ पे Titanic Ship के बनने का काम शुरू किया गया, ये जब बनने का काम शुरू किया गया तो करीब तीन हज़ार लोगों की एक टीम थी जिसने Titanic Ship को बनाया था,

करीब सवा दो साल लगे थे titanic जहाज़ को बनाने में जहाज़ को बनाने के दौरान भी कई चीजें हुई अलग अलग हादसों में, दो लोगों की जान चली गयी, काम करते हुए करीब ढाई सौ लोग घायल हुए, लेकिन तमाम कोशिश के बावजूद और पचहत्तर लाख Dollar खर्च करने के बाद 31 मई 1911 titanic जहाज पूरी तरीके से बनकर तैयार हो गया,

Titanic Ship

Titanic Ship जिस आलीशान तरीके से बनाया था बनाया गया उसमें swimming pool से लेके तमाम चीज़ें, और bar casino सब कुछ, और इसको तीन class में बाँटा गया था first class second class और third class

और इसके बाद पानी में Titanic Ship का trial हुआ, और फिर ये तय किया गया कि Titanic का पहला सफर कहाँ से कहाँ होगा, और वो सफर भी final हुआ कि अगले साल अप्रैल 1912 में Titanic जहाज का पहला सफर शुरू होगा जो England से होकर New York के लिए होगा।

Titanic जहाज की क्षमता

करीब तो तीन हजार पाँच सौ सैंतालीस लोगों को ले जाने इस Titanic Ship capacity थी, और इसमें करीब 63 हजार लीटर पानी पीने का वो रखा जा सकता था, चालीस टन आलू, करीब सोलह सौ किलो प्याज, सिक्सटीन हंड्रेड फोर्टी थाउजेंड अंडे, और जरूरत की बाकी सारी चीजें इस जहाज में रखा जा सकता था,

Titanic जहाज की Speed

ये उस वक्त सबसे तेज चलने वाला जहाज था, इसकी गति थी 43 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से इस titanic Ship की Speed थी, उससे पहले जो record था वो पैंतीस छत्तीस किलोमीटर प्रति घंटा हुआ करता था,

Titanic Ship accident हुआ कैसे

Titanic Ship का उस वक्त प्रचार भी किया गया, कि सबसे सुरक्षित जहाज है, इसमें कोई हादसा नहीं हो सकता, हालांकि इसको लेके बहुत सारी बातें हैं,

Titanic को अपनी पहली यात्रा के दौरान जब ये सफर का आगाज़ हुआ तो ये Britain से New York जा रहा था, और इसका route पहले से तय था,

Titanic Ship England के South Hempton से अपने सफर का आगाज़ करता है, और फिर इसे France के chairburg में पहली बार एक stop था, वहाँ रुकना था, और उसके बाद Ireland के queens down में रुकना था, और उसका तीसरा stoppage सीधे सीधे New York था, और वहीं पे New York में इसको 17 अप्रैल 1912 सुबह सुबह वहाँ के बंदरगाह पर इसे पहुँचना था,

जब इस सफर की शुरुआत हुई, तो करीब पैंतीस सौ मुसाफिर इसमें बैठ सकते थे, लेकिन जो पहले सफर की बुकिंग हुई थी उसमें कुल 2222 लोग सवार थे, जिनमें 1314 passenger थे और 908 crew member थे, इस सफर के दौरान में इस Titanic Ship के owner जो थे इसमें वो भी अपनी family के साथ सवार थे,

सफर का आगाज़ ठीक ठाक था, दिन भी अच्छा बीता दूसरा दिन भी ठीक बीता, तीसरा दिन भी अच्छा बीता मौसम भी सही था, Titanic Ship को जिस हिसाब से बनाया गया था वो भी सही था,

Titanic जहाज iceberg से कैसे टकराया

लेकिन जब चौथा दिन आता है, 10 अप्रैल 1912 को Titanic Sout hampton से निकला और, अब 14 अप्रैल 1912 की तारीख आ गयी, चार दिन बीत गए थे, रात के करीब ग्यारह बजकर चालीस मिनट हो रहे थे, और तभी वो समंदर में एक iceberg से टकरा गया, और वहाँ पे ऐसे छह iceberg के होने की पहले से चेतावनी दी गयी थी,

captain Edward Smith

जहाज के captain Edward Smith इसमें थे इन्हें मालूम था कि छह iceberg इस तरीके का खतरा है, और खतरा टाला जा सकता है,

और ये कहते है ये accident टल सकता था, अगर Titanic की speed कम होती, लेकिन जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त Titanic की जो speed थी वो बहुत ज़्यादा थी, और कहते है कि उसकी वजह ये थी, कि जो Titanic ship के owner थे, वो Captain Edward Smith को ये कह रहे थे कि तुम तेज़ चलाओ शायद वो record भी बनाना चाहते थे,

कहते है कि अगर तीस सेकंड पहले ये जहाज मुड़ चुका होता या, तीस सेकंड पहले Captain ने action ले लिया होता मोड़ने का तो titanic Ship का accident नहीं होता,

टक्कर बड़ी खतरनाक थी, और बहुत जोरदार थी, तमाम मजबूत के बावजूद इस टक्कर से अगले हिस्से को जबरदस्त नुकसान पहुँचाता है, इस titanic ship के अंदर सोलह ऐसे दरवाजे थे, जो पानी को बाहर से अंदर आने के लिए रोकने का काम कर रहे थे, जिनको जल रोधी दरवाजे भी कहते है,

इस iceberg के टक्कर की वजह से इन सोलह में से पाँच दरवाजे टूट गए, और उनके टूटने की वजह से जो पानी था समंदर का वो तेजी से titanic ship के अंदर आना शुरू हो गया, तब तक Captain और बाकी लोगों को ये एहसास हो चुका था कि हादसा हो चुका है, और बड़ी तेजी से पानी अंदर आ रहा है,

Titanic Ship

तो कुछ भी हो सकता है. अगले दो घंटे और चालीस मिनट तक तमाम कोशिश के बावजूद ये दरवाजे बंद नहीं किए जा सके, और पानी Titanic Ship के अंदर घुस गया, मायनस 2 डिग्री बाहर तापमान था, पानी बेहद ठंडा था, और अचानक रात के ग्यारह बज के चालीस मिनट पे ये Titanic Ship accident हुआ.

बहुत सारे लोग नींद में भी थे, अफरा तफरी मच चुकी है, अब इस अफरा तफरी के बावजूद लोगों की जान बचाई जा सकती थी, क्योंकि titanic ship पे life boat भी था,

लेकिन यहीं पे बहुत सारे सवाल उठे life boat जो था ये फर्स्ट क्लास के ज्यादा करीब रखा हुआ था, फर्स्ट क्लास के मुसाफिर और उनके टिकट के पैसे बहुत ज्यादा थे, उसके बाद सेकंड क्लास पे थर्ड क्लास थर्ड क्लास में जो लोग थे वो बेहतर जिंदगी के लिए अमेरिका जा रहे थे,

खैर तो life boat के जरिए लोगों को बचाने की अब कवायत शुरू होती है, लेकिन जिस हिसाब से इसमें मुसाफिर सवार थे उतनी तादाद में life boat नहीं थी, इस Titanic ship में उस दिन कायदे से लोगों की गिनती को देखते हुए 64 life boat होने चाहिए थे, लेकिन Titanic ship में सिर्फ 20 ही life boat थे,

Titanic Ship

तो तय ये हुआ कि जो महिलाएँ और बच्चे हैं सबसे पहले उनको life boat से निकाला जाएगा, बीच में फिर ये भी हो गया कि जो अमीर लोग थे उसमें बहुत सारे वो ये था कि हमने ज्यादा पैसे दिए पहले हमें बचाओ,

जब धीरे धीरे life boat से लोगों को निकालने जब शुरू हुई तो बहुत सारे लोग लालच में और अपनी जान बचाने के लिए जैसे एक life boat में अगर 67 लोग करीब average बैठ सकते थे, उसमे सिर्फ बीस बीस पंद्रह पंद्रह लोग ही बैठकर निकल गए, तीस चालीस को और बिठा सकते थे, लेकिन बिठाया नहीं क्योंकि उनको लगा कि उनकी जान चली जाएगी,

Titanic Ship accident में कितने लोग मारें गए

अफरा तफरी का आलम था, और इस तरीके से जो llife boat थे उसका भी पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया, और यही वजह है कि वक्त बीतता गया और इन दो हज़ार दो सौ बाईस लोगों में से करीब पंद्रह सौ से ज्यादा लोगों की जान चली गयी, और सिर्फ इसमें सवार 706 लोगों की ही जान बचाई जा सकी,

जिस जगह पे टाइटनिक डूबा था वहाँ पे पानी में तापमान जो टेम्परेचर था वो माइनस टू डिग्री था, मतलब अगर उस पानी के अंदर कोई इंसान गिरे तो, मैक्सिमम पंद्रह से बीस मिनट तक वो जिंदा रह सकता है, उसके बाद उसकी मौत तय थी,

मरने वालों में बाद में सिर्फ करीब 340 लोगों की ही लाशें मिली, बाकी की लाश भी नहीं मिली, और इस जहाज में डूबने वालों में सबसे ज्यादा जो थे वो पुरुष थे, उसकी वजह ये थी कि ये तय हुआ था कि जिन लोगों की जान बचानी है उनमें सबसे पहले महिलाएँ और बच्चे होंगे उनको llife boat दी जाएगी, और वो उससे बाहर निकलेंगे तो शायद इसकी वजह यही है कि पुरुषों की जान ज्यादा गयी.

लेकिन इस जान बचाने और मरने के बीच में अमीरी और गरीबी यहाँ पर भी काम कर गयी, Frist class में जो लोग सवार थे उनमें से साठ फीसदी लोगो की जान बचाई गयी, second class में जितने लोग सवार थे उसमें से 42 फीसदी लोगों की जान बचाई गयी, लेकिन third class में जितने लोग थे उनमें से सिर्फ 25 फीसदी लोगों की की जान बचाई गयी, मतलब हर सौ में जो third class में था उनमे से पचहत्तर लोगों की जान चली गयी, और सबसे ज्यादा मरने वालों की तादाद third class में ही थी,

और इस तरह से Titanic Ship की पहली और आखरी यात्रा खतम हुई

उसके बाद 1997 में Titanic Movie आयी थी, और बहुत ही अच्छा film आया गया था, इसलिए Titanic Movie को ग्यारह Oscar Award मिले, और काफी खर्च भी किया गया था, पचहत्तर लाख Dollar में Titanic जहाज़ बना था, और बीस करोड़ Dollar में Titanic movie बनी थी.

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